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सिंध को-ऑप. क्रेडिट सोसाइटी बिना सहकार नहीं उद्धार
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अध्यक्ष का संदेश

प्रिय सहकारी सदस्यों,
जय झूलेलाल

सिंध को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड, वारसिया, वडोदरा के प्रिय सदस्यों, सहकारी साथियों और वडोदरावासियों का संस्था के अध्यक्ष के रूप में मैं नतमस्तक होकर स्वागत करता हूँ और आभार व्यक्त करता हूँ। आप सभी ने मुझे पिछले तीस वर्षों से संस्था की सेवा का अवसर दिया है।

अध्यक्ष के रूप में आपको संबोधित करते हुए मुझे प्रसन्नता है कि हमारी संस्था की स्थापना 16/02/1974 को 14 संस्थापक सदस्यों द्वारा की गई थी। संस्था का पंजीकरण क्रमांक से.-2788 है। पंजीकरण के समय का पता टी-66, कैंटीन बंगले के पास, संत कंवर कॉलोनी, वडोदरा था।

संस्था की स्थापना का मुख्य उद्देश्य सिंधी समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग को आर्थिक सहायता देकर सक्षम बनाना था। आज़ादी के बाद देश के विभाजन का सबसे अधिक दंश सिंधी समाज ने झेला। उसके बाद लंबे समय तक हुए सांप्रदायिक दंगों में सिंधी व्यापारियों की केबिनों और दुकानों को भारी नुकसान हुआ और रोज़गार ठप हो गए।

उस समय सिंधी व्यापारी भाइयों की आर्थिक मदद करने वाला कोई नहीं था और समाज संगठित भी नहीं था। ऐसे समय में सिंधी समाज को एकजुट और संगठित कर, आपसी सहयोग से पूँजी खड़ी कर, ज़रूरतमंदों की आर्थिक मदद के उद्देश्य से संस्था की स्थापना की गई।

शुरुआत में संस्था ने अपना काम एक किराए के छोटे कमरे से शुरू किया। समय के साथ संस्थापक सदस्यों और कर्मनिष्ठ कर्मचारियों की मेहनत, निष्ठा और प्रतिबद्धता तथा सदस्यों के अपार विश्वास, एकता और सहयोग से संस्था लगातार मज़बूत हुई और उसकी सेवा क्षमता बढ़ती गई।

कार्यकारी सदस्यों की पारदर्शिता, अनुशासन और सदस्य-केंद्रित नीतियों के कारण संस्था की स्थिति मज़बूत हुई। लंबे समय के सतत विकास के बाद अपने भवन से कार्य करने का सपना साकार हुआ। आज सोसाइटी गर्व से अपने भवन से कार्य कर रही है, जो सदस्यों की मेहनत, विश्वास और प्रगति का प्रतीक है।

यह उपलब्धि केवल आर्थिक सफलता नहीं, बल्कि सदस्यों के आपसी विश्वास और सहयोग का जीवंत उदाहरण है। किराए के छोटे कमरे से एक मज़बूत और स्वतंत्र संस्था बनने की यह यात्रा सच्चे अर्थों में सहकार और सामूहिकता की साक्षी है।

हमारी सोसाइटी आगे बढ़ रही है; भविष्य और अधिक सुरक्षित व समृद्ध हो, यही प्रभु से प्रार्थना है। मुझ पर विश्वास रखकर अध्यक्ष के रूप में साथ देने वाले सभी पदाधिकारियों और कार्यकारी सदस्यों का मैं हृदय से आभार मानता हूँ। संस्था के कर्मचारियों ने लगन, उत्साह, निष्ठा और ईमानदारी से, समय की परवाह किए बिना अपने कर्तव्य निभाए हैं, उनका भी आभार व्यक्त करता हूँ।